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शुक्रिया

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’285
फ़ाइलुन
शुक्रिया
दिलरुबा
आपने
ग़म दिया
कौन हूँ
क्या पता
कुछ बता
क्या हुआ
हो गया
रतजगा
कह उठे
तख़्लिया
चल पड़ा
क़ाफ़िला
मुझमें है
वह बसा
मैं 'कँवल'