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मेरे हमसफ़र
रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें
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#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'244
एक रुकुनी ग़ज़ल
मु त फ़ा इ लुन
1 1 2 1 2
मेरे हमसफ़र
मेरी बात कर
न भटक अभी
तू इधर - उधर
करो गुफ़्तगू
सरे-रहगुज़र
ये हयात है
बड़ी मुख़्तसर
कड़ी धूप है
न कोई शजर
रहे-इश्क़ है
बड़ी पुरख़तर
है 'कँवल' ग़ज़ल