#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'124
फ़ाइलुन फ़ाइलुन
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जी हुजूरी करो
हर ख़ुशी मुफ़्त लो
द्वार पर शान से
मुस्कुराओ, हँसो
जुस्तजू अम्न की
ख़ुद में करते रहो
कौन मुझसे बड़ा
इस पे झगडा न हो
मस्जिदों से अज़ाॅं
शोर है मत कहो
घंटियाँ मंदिरों
में बजा ख़ुश रहो
ये नयी नस्ल है
पत्थरो! चल पड़ो
तर्बियत ख़ूब है
मन में नफ़रत भरो
कैसी तालीम है
कार पंक्चर करो
हौसला हो अगर
जामे- ग़म फेंक दो
मौसमों से 'कँवल'
मत गुज़ारिश करो