#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल' 030
फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
आपका जो ख़त पढ़ा
दिल तरो-ताज़ा हुआ
अब कहाँ शिकवा गिला
अब सितम में भी मज़ा
है इलेक्शन की फिज़ा
वादे पर वादा बड़ा
आपकी बातें सुनीं
ध्यान से चेहरा पढ़ा
लब पे जग की बंदिशें
आँख ने सब कुछ कहा
हो गए जब हम बड़े
झूठ कहते हैं खरा
टैक्सपेयर क्या करें
धन कमाई का लुटा
झूठ हारेगा 'कँवल'
रखिए दिल में हौसला