Back to List
मौन हो
रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें
Translation
हिन्दी
اردو
English
Roman
#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'254
फ़ाइलुन
मौन होतो सुनोकुछ कहोकुछ करोखिडकियाँ खोल दो
ख़ुद में ही मत जियो अज़्म इक दिल में हो
नफ़रतें मत करो
पत्थरों से बचो
दोस्ती अब करो
धर्म पर मर मिटो
रौशनी
बन चलो