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सरस्वती वंदना

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

सरस्वती वंदना
हँसवाहिनी माँ की जय जय
वीणावादिनी जय हो
शुभ्रज्योत्स्ना भरो हृदयमें
अन्धकार सब क्षय हो
पद्मासना श्वेत वस्त्रा माँ
तेरी जय जय जय हो
2
पुलकित ज्ञान ज्योति में
मेरी सद्बुद्धि की लय हो
ज्ञानदायिनी तब प्रकाश में
मेरा तिमिर विलय हो
कमल आसनी वागीश्वरी माँ
तेरी जय जय जय हो
3
तेरे चरणों की पावन रज
मस्तक मेरे सोहे
धूप दीप नैवेद्य सुधा से
अर्चन वंदन होवे
बुद्धि वर्धिनी अमृतमयी माँ
तेरी जय जय जय हो
4
ज्योतिर्मय शुभ जल प्रपात से
ज्ञान पुंज नित बरसे
नित उड़ान हो नयी सफलता
से प्रतिदिन मन हरसे
कृपा सिंधु माँ तेरी जय जय
तेरी जय जय जय हो
5
वरदहस्त हो मेरी कलम पर
मम सौभाग्य उदय हो
दुख अभाव सबके हर लो माँ
इन पर विश्व विजय हो
ताल-छंद गति लय पर जय हो
माँ तेरी जय जय हो
हँसवाहिनी माँ की जय जय
वीणावादिनी जय हो
पद्मासना श्वेत वस्त्रा माँ
तेरी जय जय जय हो