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चले आओ
रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें
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#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'102
मफ़ाईलुन
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चले आओ
न अब जाओ
मुहब्बत है
तो मुस्काओ
मेरे सँग़ तुम
हँसो गाओ
सलीक़े से
उसे पाओ
उसे पा कर
न इतराओ
सियासत से
तो बाज़ आओ
ग़ज़ल क्या है