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ग़म छुपाने में वक़्त लगता है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'088
ग़म छुपाने में वक़्त लगता है
मुस्कुराने में वक़्त लगता है
रूठ जाने का कोई वक़्त नहीं
पर मनाने में वक़्त लगता है
ज़िद का बिस्तर समेटिये दिलबर
घर बसाने में वक़्त लगता है
जाने आने की बात मत कीजे
जाने आने में वक़्त लगता है
यक ब यक भूलना है नामुमकिन
भूल जाने में वक़्त लगता है
वह अभी बन संवर रही होगी
उसको आने में वक़्त लगता है
जाम पीते हैं जो नज़र से उन्हें
जाम उठाने में वक़्त लगता है
आज़मा मत,भरोसा कर मुझ पर
आज़माने में वक़्त लगता है
बेटियों को बचा के रखिये’कँवल’
उनको पाने में वक़्त लगता है
प्रकाशन : संदल सुगंध
ग़ज़ल का बदलता मिज़ाज
अदबी महाज़ कटक में
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यू tube पर रंजना झा की आवाज़ में
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