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ग़म के दस्तरख्वान पर ख़ुशियाँ सजा सकता हूँ मैं

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'087
ग़म के दस्तरख्वान पर ख़ुशियाँ सजा सकता हूँ मैं छाँव में काँटों की फूलों को खिला सकता हूँ मैं ज़ालिमों के ज़ुल्म से बेशक बचा सकता हूँ मैं साथ देकर आपकी हिम्मत बढा़ सकता हूँ मैं हाथों में युवकों के अब पत्थर कहाँ है देखिये दस्त में उनके हुनर आला थमा सकता हूँ मैंबायोमेट्रिक हाज़िरी से है इज़ाफ़ा काम में टेक्निक से इक नया भारत बना सकता हूँ मैं टिमटिमाते जुगनुओं की बस्तियों की खैर हो एक सूरज हूँ उन्हें पल में बुझा सकता हूँ मैं आई मिस यू , आई लव यू वायरस के जाल में फंसने वाली लड़कियों को कब बचा सकता हूँ मैं फ़िक्र के दफ़्तर में शोहरत की उगाही के लिए देश को परदेश में गाली सुना सकता हूँ मैं कौन कहता है 'कँवल' सारे मुख़ालिफ़ मिल गए अब भी उनको एक दूजे से लड़ा सकता हूँ मैं
रमेश 'कँवल'