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हुस्न है दिलकश तबाही इश्क़ को मंजूर है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

हुस्न है दिलकश तबाही इश्क़ को मंजूर है
फिर भी जाने क्यों मुहब्बत आज तक मजबूर है
ये रूदादे-हुस्ने-माहो-अंजुमे-अफ्लाक1 उफ क्या ज़मीं पे कुछ नहीं क्या अर्श2 से ही नूर है
मुफि़लसों3 की रोटियां, अम्नो-अमां 4 जीने का हक़ छीनने वालों से मुझको दुश्मनी मंजूर है
ये हयाते-मुख़्तसर5 लंबी ये फ़न6 की सरहदें
चल रहा हूं फिर भी गो7 मंजि़ल बहुत ही दूर है
दीद की हसरत है पर वो सामने आते नहीं
एक मुíत से 'कंवल’ दीदार से महजूर8 है