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हुनर पैरवी का सिखाते हमें

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’307
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़अल
हुनर पैरवी का सिखाते हमेंअदालत के गुर कुछ बताते हमेंॲंधेरे का स्विच ऑफ़ करके कभी उजाले की बस्ती दिखाते हमें जिये अपनी मर्ज़ी से जनता कभीये बिल पेश करते लुभाते हमें तरन्नुम की मलिका ने चाहा जिन्हें ग़ज़ल ख़ूबसूरत सुनाते हमें चुनावों में जो व्यस्त हैं सालों भर तरक़्क़ी के गुलशन में लाते हमें पहाड़ों के ग़ुस्से का ज्वालामुखी नदी सॅंग उतर कर डराते हमें कॅंवल प्यार के शे'र भी कुछ कहो