Back to List

हर ऑफिस में एक सा मंज़र

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’301
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
हर ऑफिस में एक सा मंज़र
हर कुर्सी पर एक सा अफ़सर
बातें तो करते हैं हॅंसकरकाम नहीं करते हैं सुंदर
एक ही चक्कर दफ़्तर दफ़्तररिश्वतखोर लगाएं चक्कर
सुविधाशुल्क अदा कर दो तो
देर नहीं लगती है पल भर
आज खड़े हैं तान के सीना
मिलते थे जो कल तक डर कर
भ्रष्टाचारी हुए इकट्ठे
दोस्त बने हैं दुश्मन खुलकर
सूरज से लड़ने को निकला देख 'कँवल जुगनू का लश्कर