#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’295
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
2 1 2 2 1 2 1 2 2 2 1 सिर्फ़ अदहन में है उबलती आग माँ की ममता है और मीठी आग मेरे होंठों पे रक्स करती आग उसके तन में छुपी रुपहली आगजब उतर आया सीमतन कोई पानियों के बदन मेंं सुलगी आगआरती पूजा कीजिए जमकरजल रही देश में त्रियोगी आगकुछ दरिंदों ने की बहुत कोशिशहौसले से बुझी धधकती आगकितनी रफ्तार में है देश अपनाझोपड़ों में है 5जी की आग डेट देने की रस्म कम होगी कोर्ट लाइव 'कँवल' है बुझती आग
सृजन : 3 अक्टूबर,2022