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साजन से मिल आई धूप

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’290
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ाअ
साजन से मिल आई धूप
ख़ुद से हुई पराई धूप
अपनी सुधि खो आई धूप
बेहद है घबराई धूप
इश्क़ की सज धज बन ठन है
हुस्न की है रानाई धूप
रात गयी ऐलान है ये
सुबह की है अँगड़ाई धूप
सूरज के रथ पर चढ़ कर
चलती है इतराई धूप
जाड़े में शैदाई बहुत
करती कहाँ सगाई धूप
'मीर' की ग़ज़लें जैसी है
'तुलसी' की चौपाई धूप
अच्छाई की मिसाल बनी
करती नहीं बुराई धूप
शाम को चल देती है 'कँवल'
शर्माती सकुचाई धूप 6 अक्टूबर,2022