#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’272
लफ्ज़ मैं और तुम मआनी हो
दोस्ती हो तो यह कहानी हो
दिल में कोई न बदगुमानी हो
हम पे ईश्वर की मेहरबानी हो
मुस्कराहट तो देन है रब की
सब के चेहरे पे यह निशानी हो
मैं कहूँ तो तुम्हारा क़िस्सा कहूँ
तुम कहो तो मेरी कहानी हो
सुन के उर्दू ज़ुबान लगता है
जैसे तहज़ीब ख़ानदानी हो
कर के ग़ुस्सा बिगाड़ मत चेहरा
रुख़ पे अम्न-ओ-अमां का पानी हो
अपनी तुलना किसी से मत कीजे
जो भी हैं उनकी क़द्रदानी हो
दास्तान-ए-‘कँवल’ सुनाऊं जब
चाँद हो,रात हो,जवानी हो
सृजन : 19 फ़रवरी 2017