#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’270
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
लगता है कुछ अच्छा दिल
आज हुआ है हल्का दिल
सुर्ख नयन हो जाते है
सहता है जाने क्या दिल
जो भी देगा रब देगा
सोच न दुखड़ा रोया दिल
एकाएक कहाँ टूटा
धीरे धीरे टूटा दिल
बेटी को जब व्याह दिया
रहता है कुछ खोया दिल
समझे थे हम दिल जिसको
पत्थर का था टुकड़ा दिल
बच्चे की ख़ातिर है बस
पुस्तक का एक बस्ता दिल
भटके तब एहसास हुआ
सीधा साधा रस्ता दिल
उभरा 'कँवल' हर इक लम्हा