Back to List

रोज़ सोते हैं जाग जाते हैं

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’269
रोज़ सोते हैं जाग जाते हैं
मौत से ज़िन्दगी चुराते हैं
एक अहसास जाग उठता है
आप तनहाइयों में आते हैं
तुम जुदा हो गए जो रस्ते से
मंज़िलों के पते न भाते हैं
हमसफ़र साथ जब नहीं होता
देख कर राह मुस्कुराते हैं
मैं कड़ी धूप में संवरता हूँ
आप जब इत्र में नहाते हैं
बीज हो जाता है फ़ना पहले
फल दरख़्तों पे तब ही आते हैं
जज़्ब करते हैं ज़ख़्म-ए-दिल पहले
फिर ग़ज़ल आपको सुनाते हैं
शोर है चार सू ‘कँवल’ साहब
शेर-ओ-फ़न के नवाब आते हैं
सृजन 23 नवम्बर 2013
(16)