#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’265 फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ा
रिश्तों को मिस्मार कियाएक नहीं सौ बार किया
ठण्ड से राहत पाने को
सूरज का दीदार किया फूल खिला कर गमले में पौधों का श्रृंगार किया कोमल बच्चों के दम पर दहशत का बाज़ार किया चैट किया, डीपी बदली दिल ने यूँ इज़हार किया छोड़ खिलौने बच्चों ने मोबाइल से प्यार किया फैलाई दहशत- वहशत मज़हब को हथियार किया हमने कर के प्यार 'कँवल'ग़म का कारोबार किया