Back to List

मेरे दोस्त पल में ख़फ़ा हो गये

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'241
मेरे दोस्त पल में ख़फ़ा हो गये
मैं हैरां हूँ क्या से वो क्या हो गये
गवाहों को पैसे मिले इस क़दर
फ़रिश्तों के क़ातिल रिहा हो गये
जो शोहरत की तख़्ती हवा ले उड़ी
पता नाम सब लापता हो गये
दवा मौत के दिन मिली ही नहीं
दुआ के असर भी फ़ना हो गये
खिलौने भी मिटटी के सस्ते कहाँ
ग़रीबों के मन बेमज़ा हो गये
ख़मोशी है पसरी हुई शहर में
अज़ाँ, शंख सब बेसदा हो गये
सियासत के दिन लौट आये ‘कँवल’
जो थे बेवफ़ा बावफ़ा हो गये
सृजन : 28 फ़रवरी 2014
प्रसारण : आकाशवाणी पटना,
महफ़िल –ए-सुखन - 17 नवम्बर 2014
(20)