#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'245
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
मेरी आँखों में आ गए आँसू
ग़म का क़िस्सा सुना गए आँसू
जबसे बेदख़्ल है ख़ुशी उसकी
उसकी आँखों को भा गए आँसू
सामना ग़म से जब हुआ उसका
सुर्ख रुख़ को भिगा गए आँसू
बैन जब अंजुमन हुआ कोई
साज़िशों को ग़ला गए आँसू
बारिशों से ये काम हो न सका
आतिशे-दिल बुझा गए आँसू
मेरी ख़ुशियों की इंतिहा न रही
जब दुखों को मिटा गए आँसू
मीर का दर्द पीर मीरा की
चुटकियों में उड़ा गए आँसू
देखते ही व्यथा विसर्जन की
झील नदियों पे छा गए आँसू
द्रौपदी को 'कँवल' पता न चला
कृष्ण पर क्या न ढा गए आँसू