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मौत है नग़मासरा अब ज़िन्दगी ख़ामोश है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'250
मौत है नग़मासरा अब ज़िन्दगी ख़ामोश है
ख़ुशनवा दिल देखिये नफ़रत के हम आग़ोश है
चल रहा हूँ मंजिल-ए-मक़सूद पाने के लिए
या ख़ुदा ! क़ायम रहे दिल में अभी कुछ जोश है
क्या मिलेगा लुत्फ़-ए-साग़र ऐसे में कहिये भला
रिंद हैं बेख़ुद अलग साक़ी अलग मदहोश है
रह के ख़ारों में भी कैसे मुस्कुराता है गुलाब
जानने को राज़ ये ख़ुशबू हमातनग़ोश है
ज़ख्म हाय ज़िन्दगी से दिल मेरा शाकी नहीं
कल भी ये ख़ामोश था और आज भी ख़ामोश है
इस जहाँ में ज़िन्दगी बेकैफ़ सी पाई ‘कँवल’
जाने किस दुनिया में रंग-ए-ज़िन्दगी रूपोश है
सृजन : 3 दिसंबर,1971
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