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मौत की दहशत छाई है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'252
मौत की दहशत छाई हैकोविड वबा जो आई है हॉस्पिटल सब फ़ेल हुए जान पे ही बन आई हैऑक्सीजन और बेड नहींमौत की बदली छाई हैकचरा गाड़ी में लाशेंशर्म किसे पर आई हैएयर फ़ोर्स की जय बोलोले ऑक्सीजन धाई हैएम्बुलेंस सब लूट रहेगाढ़ी अभी कमाई हैमिलती है जो ब्लैक में अबये कोविड की दवाई हैमस्त चुनावी भीड़ जुटी
नेता तुझे बधाई है
बाराती को खौफ़ कहाँ कोविड में भी सगाई है
शहर नगर से बुरी है ख़बरआंख 'कंवल' भर आई है