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भूल जाओ गया सो गया

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'223
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
भूल जाओ गया सो गया
अब संभालो बचा जो बचा
चाँदनी को चलो ओढ़ लें
चाँद ग़म का उगा तो उगा
कितना आबाद यह दश्त है
घर वो वीरां पड़ा तो पड़ा
आओ सस्ते में बिक जाएं हम
शहर महंगा हुआ तो हुआ
मंज़िलों को ख़बर कीजिये
रास्ता नम दिखा तो दिखा
दोस्ती क्यूँ समझ लूं इसे
मिलना- जुलना हुआ तो हुआ
मुझमें रहने लगा वो 'कँवल'
उसका दफ़्तर लुटा तो लुटा