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बे हद मालामाल हुआ

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'221
वैवाहिक जीवन के 44 वें साल में
बे हद मालामाल हुआ जीवन ये ख़ुशहाल हुआ
सुख के धन की मंडी में पाकर तुम्हें निहाल हुआ
उलझन की रणभूमि में साथ तुम्हारा ढाल हुआ
तुम सुगंध बन साथ रहे ज्यों पूजा का थाल हुआ