#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'219
बेटियों की बहुत ज़रूरत है
इनके दम से घरों में जन्नत है
अम्न भी इनकी ही बदौलत है
शामिल -ए- रंजो-ग़म मसर्रत है
नेक बीवी ख़ुदा की ने'मत है
वह शरीके हयाते फ़ानी भी
दह्र की खुशियों की ज़मानत है
है बहन,बीबी,बेटी, पोती, मां,
इनसे ही दुनिया खूबसूरत है
बन के मां है सलामती की दुआ
बन के बहना ये नेक चाहत है
तोतली बोली, नाज़ नखरों में
बेटी हर जश्न की महूरत है
उंगलियों को पकड़ के पोती भी
दादी दादा की करती ख़िदमत है
किस महकमे में कामयाब नहीं
आज कमतर कहां ये औरत है
जन्म इनको जरूर दीजे 'कँवल'
बेटियों की बहुत ज़रूरत है
सृजन : 6 मार्च 2018
प्रकाशित : कौमी तंजीम,पटना 7 मार्च 2018
लेख्य मंजूषा की पत्रिका साहित्यिक स्पंदन के जुलाई-सितम्बर 2018 अंक
(65)