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बदतर ही हालत किया

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'210
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
हमने सुख निर्यात किया
पर आँसू आयात किया
सन्नाटे हैं आँखों में
दिन को हमने रात किया
सुन्दर विश्व बनाने को
रामायण निर्यात किया
तुलसी की चौपाई ने
हर रिश्ता विख्यात किया
दास कबीर की वाणी ने
हर रुढ़ी पर घात किया
स्पीकर सब उतर गए
प्रदूषण खैरात किया
ध्वनि सीमा कम करने को
कब कोई आफ़ात किया
धर्म सनातन वही 'कँवल'
जिस ने मन इस्पात किया