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बड़े ही खूबसूरत हैं बड़े प्यारे, मज़े के दिन -

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'209
मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन
बड़े ही खूबसूरत हैं, बड़े प्यारे मज़े के दिनजो गुजरे संग तेरे सच में हैं वे ही सुनहरे दिन
तेरे साँसों की ख़ुशबू जब मुझे झूले झुलाती है
सुगन्धित पुष्प वन में याद आते हैं सुहाने दिन
मिले छुटकारा कैसे राह में कोई ये बतलाए
तेरी यादें, दुपहरी जेठ की, अलसाये मेरे दिन
लगाते हैं जो भारत तोड़ने के नारे शहरों में
वो एयर कूल रथ पर गिन रहे है एकता के दिन
इनायत पादरीयों पंडितों मुल्लाओं की होगी
नसीहत से न जो मैले करें शतदल के उजले दिन
सनातन धर्म की जब हो चतुर्दिक जय भला इससे
कहाँ होंगे कभी बढ़कर बताएं आप अच्छे दिन
'कँवल' लहरा के परचम होशियारी और हिम्मत का
सुरक्षित कर लिए नभ,जल,धरा पर बेटियों ने दिन
5 अक्टूबर,2022