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पाँव बुजुर्गो के दाबे

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'201
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
पाँव बुजुर्गो के दाबे
भाग्य हमारे तब जागे
कमरे में जब ख़्वाब मिले
टांग दिया कोने कोने
एक पहर बरसे बादल
सड़कों पर नाले उतरे
इत्र की शीशी खोल दिया
ख़ुशबू के ज़ेवर झूमे
दर्दों-ग़म की खूंटी पर
सूख गए अरमाँ सारे
चाँद मिला चौराहे पर
यादों के दफ़्तर खोले
मुट्ठी में रह पाए कहाँ
जुगनू के लश्कर भागे
हुई चाँदनी बेहद ख़ुश
मांग में जब तारे टांके
कोई शनासा मिला नहीं
हमने 'कँवल' जी भर परखे