Back to List

निगाहों में बसी है तेरी मूरत

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'193
मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन
निगाहों में बसी है तेरी मूरत
मेरे दिल को नहीं औरों की चाहत
कहीं लगती नहीं मेरी तबीयत
मुझे मिलती है बस तुमसे ही राहत
है मेरी ज़िन्दगी तेरे हवाले तुम्हारे नाम दिल ने की वसीयत
मिलो, मिल कर बिछड़ जाओ ख़ुशी सेविरह का दर्द रहने दो यथावतमुझे दो पेड़ बनकर छाँव ठण्डी कुँवर से अब बना डालो तथागत
यही तारीख से सीखा है हमने नहीं भूलें कभी अपनी विरासत‘कँवल' जयचंद की दुहराने साज़िश वतन से लोग जाते हैं विलायत