#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'171
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
दाल रोटी और दवाई के सिवा क्या चाहिए
लॉक डाउन में मेरे भाई भला क्या चाहिए
शर्ट टाई पैंट पहने कोई अब फ़ुर्सत कहाँ
अब नहाना खाना सोना है सखा क्या चाहिए
एक बिस्तर दो बदन माज़ी के ख्वाबे-दिलनशीं
घर है, टीवी, फ़ैन से बेहतर हवा क्या चाहिए
शाहराहों पर गली कूचों में बेहद शोर है
पागलों - सी चीख़ती ज़ालिम क़ज़ा क्या चाहिए
घर में रहिये, घर में ही महफूज़ है यह ज़िन्दगी
घर से बाहर मौत है कहिये वबा क्या चाहिए
औरतें छल बल से बेबस हो गईं दालान में
मर्द की मर्दानगी ख़ुश है मज़ा क्या चाहिए
हमसे तो पूछी नहीं है ख़ैरियत उसने कँवल
आप से किसने कहा, किसने कहा क्या चाहिए
सृजन : 15 मई,2020