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दिल की दुनिया हो गई जे़रो-ज़बर1

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'176
दिल की दुनिया हो गई जे़रो-ज़बर1
जब भी याद तेरा तर्जे़-सफ़र2
वो सलामे-शौक़3 वो अ फ़सुर्दगी4
वक्ते-रूख़सत5 वो तेरी नीची नज़र
ख़ारे-तिश्नालब6 की आंखों में चमक
आबला-पा मुझको बढ़ता देखकर
इश्क़ ही के दम से दोनों की बहार
दश्ते-वहशत 7 हो कि हो मजनूं का घर
इश्क़ की तक़दीर में कुछ भी नहीं
शमअ़ को जलना है लेकिन ता-सहर 8
इखि़तयार9 अपनी ही हस्ती 10 पर नहीं
आ गई है जिंदगी किस मोड़ पर
जब ढ़ले इफ़लास11 के सांचे में हम
फिर गई हमसे ज़माने की ऩजर
फूल बरसाये थे मैंने जिस जगह
है उसी वादी में ज़ख़्मी मेरा सर
हूं 'कंवल मैं फूल इक मसला हुआ
बांटता हूं दहर12 को खुशबू मगर