#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'172
दिन को दिन लिखना, रात मत लिखना
जो हो अनुचित वो बात मत लिखना
अपने अपनों की घात मत लिखना
किसने खाई है मात मत लिखना
फ़लसफ़ा कहना हुक्मरानों का
हुक्मरानों की ज़ात मत लिखना
चाल चलना, संभलना शह देना
जज़्ब -ए- इंबिसात मत लिखना
अपनी औक़ात का पता देना
दुश्मनों की विसात मत लिखना
दायरा प्यार का बढ़ाना तुम
नफ़रतों की सिफ़ात मत लिखना
झुंड में झुंड से अलग रहना
साधुओं की जमात मत लिखना
सहल कैसे हुई रक़म करना
ज़िन्दगी मुश्किलात मत लिखना
डूबना और उभरना चेहरों पर
दिल पे ही तास्सुरात मत लिखना
क़हक़हों के जलाना टयूब 'कँवल'