#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'148
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
डूबने वालों में उसका नाम है
इक शिनावर का अजब अंजाम है तैराक
फाँकता था गर्द वो जिस राह की
वो सड़क उस अजनबी के नाम है
आ न जाए पांव के नीचे कोई
सूखे पत्तों में मचा कुहराम है
शुहरतें ग़ज़लों ने यूँ बख़्शी उसे
रात-दिन घर में न रहना आम है
है सदा उनको रिआयत की तलब
कुछ पहुंच वालों में उनका नाम है
औरों की ख़ुशियों में जो रहते हैं ख़ुश
उनके रुख़ पर रौनक़े-इल्हाम है ईश्वरीय चमक
लोग आये हैं चुनावी भीड़ में
अब करोना ही ‘कँवल’ अंजाम है
19 अक्टूबर, 2020