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जुनू हूं, आशिक़ी हूं

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'126
जुनू हूं, आशिक़ी हूं
बशर हूं, बंदगी हूं
ब - ज़ाहिर बेरूखी हूं
वफ़ा की बेबसी हूं
गुलों की ताजगी हूं
मैं शबनम की नमी हूं
शरीके - जिंदगी हूं
मैं मस्ती की नदी हूं
दिसंबर का हूं सूरज
मई की चांदनी हूं
निहारो रात - दिन तुम
मैं इक सूरत भली हूं
हया सिंगार मेरा
कली की सादगी हूं
गवाही मुजरिमों की
अदालत में खड़ी हूं
मुहब्बत का हूं कायल