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जुनूं की वादियों से दिल को लौटाना भी मुश्किल है

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'125
जुनूं की वादियों से दिल को लौटाना भी मुश्किल है
तुम्हें खोना भी मुश्किल है, तुम्हें पाना भी मुश्किल है
मेरे तपते सुलगते रोज़ो-शब1 मजबूर हैं लेकिन मेरे ख्‍़वाबों के जंगल का झुलस जाना भी मुश्किल है
समझदारी का मौसम ले उड़ा तिफ़्ली2 की रअ़नाई3 खिलौने दे के अब बच्चे को बहलाना भी मुश्किल है
निगाहो - दिल में हंगामों के आसेबी4 जज़ीरे5 हैं मगर चेहरे के सन्नाटों को झुठलाना भी मुश्किल है
बहुत मुश्किल है वापस ले के आना ख़ुशियों का सूरज
उदासी के घने कोहरे को बिखराना भी मुश्किल है
हक़ीक़त आशना6 लोगो ने भी झूठी गवाही दी 'कँवल’ सच्चाई को आइना दिखलाना भी मुश्किल है
1 . रात दिन हर समय 2. बचपन 3. सुन्दरता शोभा4. भूत-प्रेत