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जब तेरी बंदगी नहीं होती

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'108
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलून
जब तेरी बंदगी नहीं होती
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं होती
मौत की जुस्तजू1 है क्यों तुझको
मौत में दिलकशी 2 नहीं होती
बात क्या है कि आजकल मुझको
तुझसे मिलकर खु़शी नहीं होती
हाय बेचारगी - ओ - मजबूरी
जो करूं बंदगी, नहीं होती
कितना दुश्वार है ये फ़न यारो
शायरी दिल्लगी नहीं होती
अब 'कँवल’ को न छेडि़येगा कभी
उसके लब पर हंसी नहीं होती