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जब उदासी ने मेरे घर का ठिकाना ढूंढ़ा

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'106
जब उदासी ने मेरे घर का ठिकाना ढूंढ़ा
मेरी ख़ुशियों ने भी जाने का बहाना खोजा
हाँ! जुदा होने के हालात थे जल्दी के मगर
वस्ल की यादों ने कुछ देर ठहरना चाहा
धूप गर्मी की रिदा तान के जब सोने लगी
घर के आँगन ने भी शबनम को बिखरता देखा
घर के बंटवारे में माँ आई मेरे हिस्से में
पंच कहने लगे जीवन का खज़ाना ले जा
बेटियों ने किया गुलज़ार हर इक आँगन को
घर में वो आईं, मसर्रत का तराना गूंजा
ख़ुशबयानी थी तेरी दूर हक़ीक़त से ‘कँवल’
सच समझते रहे सब जिसको फ़साना निकला
सृजन : 12 अप्रैल 2013
दूरदर्शन पटना से 19 नवम्बर 2014 को आईना कार्यक्रम में प्रसारित
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