#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'105
श्रद्धा के दो फूल मेरे (लता मंगेशकर को आदरांजलि)
छोड़ कर चल गयीं जहाँ फ़ानी
गीत संगीत की महारानी
आप मलिका थीं ताल सुर लय की
आपके दम से थी ग़ज़ल ख़्वानी
वो भजन हो कि गीत नग़्मा हो
आपका था कहाँ कोई सानी
मंत्र हों या हो राम शिव की कथा
गूँजे मंदिर में आपकी वाणी
गीत दर्दीले हों कि ख़ुशियों के
आप सारी धुनों की हैं रानी
संत, योगी, जवान, बच्चे क्या
आपको गायें दादी और नानी
आप मंज़िल थीं गायिकाओं की
सब ने बनने की आप-सी ठानी
आप क्रिकेट की फैन थीं, सच है
सारी दुनिया ने बात यह मानी
हैं अक़ीदत के फूल पेश 'कँवल'
आपके क़दमों में महारानी