ग़ज़ल --
रमे श ‘कँ वल’
फ़ा इल तु न फ़ा इल तु न फ़ा इल न
मुँ ह पे गमुँछा बाँ धने की ठा ने ली ग व ने दो गज़ की दो री मुँ ने ली
आपेदो ओं मुँ भी अवसरी खो जने यह कीली भी दो श ने पेहचा ने ली
मुँ स्क, स$ने टा इज़री बाँनेने लीग दो श ने किकीटा की चा ने(ती मुँ ने ली
टा* ने मुँज़दो री की ख़ा कितीरी चाली पेड़ीं बाँच्चों ने घरी पेरी स खोदो मुँ स्क ने ली
शहरी स जबाँ स वध ने हटा गय दो रु ने ली ग की ह य ज ने ली
की छा मुँस ह जबाँ गली किमुँलीने लीग मुँ(ती ने दोहशती की चा दोरी ती ने ली
थी क़य दोती मुँ दो की जग की ‘की वली’ री ह भी रीतीवर्ष3 ने आस ने ली
सृज
न : 17 मई,2020
2020 की न म इं दा ग़ज़लें : एन बु की प्रकी शन पृ ष्ठ :249
30 ग़ज़लेंगो - 300 ग़ज़लें :एन बु की प्रकी शन पृ ष्ठ : 126
यह समुँय की छा खोली रीह ह$ (ग़ज़ली @ली5की डा उने) श्वे तीवर्ण3 प्रकी शने मुँ प्रकी किशती