#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'083
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
खुशियों का दीदार है औरत
सपनों का संसार है औरत
प्रकृति का आधार है औरत
माँ का पहला प्यार है औरत
चाची फ़ूआ दीदी मौसी
रिश्तों का विस्तार है औरत
साफ़ सफाई शिक्षा सेहत
घर में इक सरकार है औरत
बच्चों की बुनियाद यही है
ममता की मीनार है औरत 5
मर्दों का दिल विल रखने को
कर लेती श्रृंगार है औरत
देश की आधी ताक़त है ये
सोई नहीं बेदार है औरत
औरों को सुख देने में ग़म
कर लेती स्वीकार है औरत
सूना है घर आँगन इन बिन
कैसे कहें बेकार है औरत
दीवाली छठ होली दशहरा
सच जानो त्यौहार है औरत 10
सोशल मीडिया पर ठग जाती
शोहदों से लाचार है औरत
जिस्मफरोशी, रेप,लफंगई
सौदों का बाज़ार है औरत
आदर-स्नेह कँवल' रखिये तो
सुख-सुविधा परिवार है औरत 13
9 अक्टूबर,2022