#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'070
फ़उलुन फ़उलुन फ़उलुन फ़उलुन
किसी के लिये आशिकी है मुहब्बत
किसी के लिए मयकशी है मुहब्बत
किसी हुस्न की दिलकशी है मुहब्बत
किसी के लिए शाइरी है मुहब्बत
थपेड़ों से जो मौत की डर गया हो
उसे पूछिये ज़िन्दगी है मुहब्बत
जो राजी हों माबूद की ही रजा में
बताते हैं वे बंदगी है मुहब्बत
जो महरूम है शुद्ध ताज़ा हवा से
'कँवल' वे कहें ताज़गी है मुहब्बत
11 अक्टूबर, 2022