#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'040
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
इशारा,तबस्सुम, नज़ाकत जवानीहसीनाओं की है लताफ़त जवानी हसीं सुर्ख़ गालों की लज्ज़त जवानी रही काली ज़ुल्फ़ों की चाहत जवानी जवां जल्द हो जाना चाहे लड़कपनजईफ़ों के दिल की है हसरत जवानी नहीं कोई डर नौजवानों के रहतेवतन की है हिम्मत जसारत जवानी तरक्क़ी की राहों ने स्वागत किया है जो करने लगी ख़ुद हिमायत जवानीधरा जल गगन पर हैं फहराए झंडे
रहे बेटियों की सलामत जवानी शराफ़त से पेश आए तो सब है उम्दानशे में 'कॅंवल' सबकी आफ़त जवानी