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आ गया इन्तख़ाब का मौसम

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'025
आ गया इन्तख़ाब का मौसम
मुल्क में इज़्तराब का मौसम
वोटरों पर कबाब का मौसम
है नशे में शराब का मौसम
रहनुमाओं का है करम लोगो
दरबदर फिरता ख़्वाब का मौसम
शायरों ने शुरू सियासत की
खो गया है किताब का मौसम
क़त्ल-ए-इख़लाक़ पर ही याद आया
सब को ये इन्क़लाब का मौसम
रेप का डर हिरन सी आँखों में
बेटियों पर नक़ाब का मौसम
याद आया गुनाहगारों को
रहमत-ए-बेहिसाब का मौसम
ऐश करता है इन निगाहों में
तेरे हुस्नो-शबाब का मौसम
रहनुमाई का शौक़ पाल ‘कँवल’
आयेगा फिर सवाब का मौसम