#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'020
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
आँखों से जब दूर हुआ दिल ये चकना चूर हुआ कुछ ऐसा मसरूफ़ रहा रिश्ता हर बेनूर हुआ घर के भीतर देख उसे इक चेहरा रंजूर हुआ झुक कर मिलता था सबसेबन्दा जो मशहूर हुआ शोहरत, दौलत, इज्ज़त पा मुख़लिस से मग़रूर हुआ दफ़्तर आंधी पानी में जाने को मजबूर हुआ देश में हिन्दू मुस्लिम को लड़वाना दस्तूर हुआ शक की बस्ती मौज में है मज़हब प्रेम से दूर हुआ