#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल' 035
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
आप से मेहरबान का वादा
दिल के नाक़द्र्दान का वादा
हाज़िरी बन गयी नवाबों की
दर पे है पीकदान का वादा
दस्तरस में ज़मीं नहीं जिसकी
कर गया आसमान का वादा
कैंसर जिनको है वे कहते हैं
मत करो पान-वान का वादा
शोरगुल से बचें, बचाएं भी
हाँ निभाएं अज़ान का वादा
उनके घी और अचार की ख़ातिर
कीजिये मर्तबान का वादा
लौट आया है श्रीनगर में कँवल
अम्न के ज़ाफ़रान का वादा