#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल' 034
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़े
आप बताएं क्या है सच
हमने तो जाना है सच
जिसने पहचाना है सच
झूठ को कब कहता है सच
आधा झूठ और आधा सच
कहिये तो रोता है सच
कह कर झूठ वो इतराए
बोले है ये सच्चा सच
आज सियासी लोग कहें
होता कहाँ है अच्छा सच
झूठ के बिस्तर पर बेबस
सोने को बेचारा सच
हमसे कँवल मत कहिये अब
कैसे हमने भुगता सच