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आपको देखा जो मैंने ख़्वाब में

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'032
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
2 1 2 2 2 1 2 2 2 1 2
आपको देखा जो मैंने ख़्वाब में
लुत्फ़े-मयकश है दिले-शादाब में
देखिए फ़ितना 'बिपरजॉय'1 का ये
शहर क्या बह जाएंगे सैलाब में
नक़्श जो छोड़ा था हमने वस्ल का
दाग़ है बेशक वही महताब में
फ़ेसबुक पर थे हजारों दोस्त पर
मैं अकेला था फँसा गिर्दाब में
मुश्किलों में फ़ासला रक्खा बहुत
दुश्मनों का रंग है अहबाब में
पंछियों के दल बड़ी हैरत में हैं
कैसे कम पानी बचा तालाब में
टूट कर मिलते है वो हमसे 'कँवल'
पर कहाँ इख़्लास है आदाब में