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आग- पानी के आस पास रही

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश 'कँवल'023
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन /फ़इलुन
आग- पानी के आस पास रही
बदहवासी मेरा लिबास रही
ग़म से निस्बत न कोई ख़ास रही
ज़ीस्त ख़ुशियों से ख़ुश- क़यास रही
जब न हद कोई और न पास रहा
ये सियासत भी बे असास रही
आप जबसे उदास रहने लगे
मेरी दुनिया बहुत उदास रही
आसमानों से उतरे हैं क़िस्से
शबनमी-सी ज़मीं पे घास रही
देख मंज़र ये लैंड स्लाइड के
ज़िन्दगी सबकी बदहवास रही
बंद क़ुदरत से छेड़छाड़ करो
ऐ 'कँवल' ये भी हक़ शनास रही