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आइये मेहरबां और पास आइये

रमेश 'कॅंवल' की दिलकश ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल@रमेश ‘कँवल’015
आइये मेहरबां और पास आइये
उलझनें ज़िन्दगानी की सुलझाइये
फ़लसफ़ा प्यार का कितना आसान है
जब मनाये कोई मान भी जाइये
ग़लतियों से सबक़ लीजिये रात दिन
कामयाबी की राहों में खो जाइये
याद रखिये गुनाहों की बेबस घड़ी
नेकियाँ अपनी दरिया में डाल आइये
शर्म आँखों में हो और गुस्ताखियाँ
होंट खामोश हों, गीत भी गाइये
बेटियों को जनम दीजिये फ़ख्र से
घर में बेटी बना कर बहू लाइये
मैं फ़रिश्ता नहीं, मैं हूँ इन्सां ‘कँवल’
देवता जान कर पेश मत आइये
प्रसारण : आकाशवाणी,पटना 25 दिसम्बर,2012
प्रकाशन : हिंदी ग़ज़ल का बदलता मिज़ाज (पृष्ठ 97)