#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’55
मेरी क़ुर्बत की चाहत कर रहे हो
मेरे दिल पर इनायत कर रहे हो
रिवाज़ों से बग़ावत कर रहे हो
ये तुम कैसी हिमाक़त कर रहे हो
नसीहत जो तुम्हें देते हैं अच्छी
उन्हीं से तुम अदावत कर रहे हो
अमीरों के इशारों के हवाले
ग़रीबों की वकालत कर रहे हो
उसूलों की वसीयत की बिना पर
रिवाज़ों की हिफ़ाज़त कर रहे हो
दुआओं में उसे तुम याद रखना
अगर बेटी को रुख़्सत कर रहे हो
'कॅंवल' करते हो मजलूमों की ख़िदमत
तो समझो तुम इबादत कर रहे हो
सृजन - 26 मई, 2025
मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन